
अनुपमा: अनुपमा (रूपाली गांगुली) ने दिग्विजय (सचिन त्यागी) का दिया साथ, सवी के कैफे को लेकर परिवार में बढ़ा संघर्ष, अनुपमा के आने वाले ट्रैक में भावनात्मक और तीखा मोड़ देखने को मिलेगा, जहां अनुपमा दिग्विजय के साथ खड़ी नजर आएगी, जो अपने ही बेटे रणविजय के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है।
यह संघर्ष तब शुरू होता है जब रणविजय सवी के कैफे पर अपना हक जताता है और उसे अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश करता है, जिससे परिवार में तनाव बढ़ जाता है।दिग्विजय के लिए यह कैफे सिर्फ एक बिज़नेस नहीं, बल्कि उसकी दिवंगत बेटी सवी की यादों और उसके सपनों से जुड़ा हुआ है। जब उसका अपना बेटा ही उससे यह सब छीनने की कोशिश करता है, तो वह अंदर से टूट जाता है।
ऐसे मुश्किल समय में अनुपमा आगे आती है और उसका साथ देती है। वह कैफे की भावनात्मक अहमियत को समझती है और इसे सिर्फ एक संपत्ति के विवाद की तरह देखने से इनकार कर देती है।
अनुपमा दिग्विजय की ताकत बनती है और उसे हिम्मत देती है कि वह अपने हक और सवी के सपने के लिए लड़े। उसकी मौजूदगी दिग्विजय में नई उम्मीद भर देती है, जो धीरे-धीरे दबाव में अपना आत्मविश्वास खो रहा था।
अनुपमा ने संभाली कमान, रणविजय बना नई मुश्किलों का कारणजैसे-जैसे विवाद बढ़ता है, अनुपमा खुद आगे आकर स्थिति को संभालने लगती है। वह रणविजय को समझाने की कोशिश करती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर मजबूती से उसका सामना भी करती है। वह साफ कर देती है कि सवी का ड्रीम कैफे किसी के निजी फायदे के लिए बर्बाद नहीं होने देगी।
हालांकि रणविजय भी अपनी जिद पर अड़ा रहता है और नई-नई परेशानियां खड़ी करता है, जिससे अनुपमा और दिग्विजय दोनों के लिए हालात और मुश्किल हो जाते हैं। इससे परिवार के बीच भावनात्मक टकराव और तीखी बहसें देखने को मिलती हैं।
अनुपमा का दृढ़ निश्चय दिग्विजय के लिए सबसे बड़ा सहारा बनता है। वह उसे मजबूत बनाए रखती है और वादा करती है कि वह हर हाल में सवी के सपने की रक्षा करेगी और न्याय दिलाएगी।
अब आने वाले एपिसोड्स में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अनुपमा और दिग्विजय इस कैफे को बचा पाएंगे या रणविजय इसे अपने कब्जे में लेने में सफल होगा, जिससे उनकी जिंदगी में बड़ा मोड़ आएगा।