
जाने अनजाने हम मिले: रीत (आयुषी खुराना) और राघव (भरत अहलावत) एक साथ खड़े हैं, कीर्ति की माँ उनका फ़ैसला नहीं बदल पाईं ‘जाने अनजाने हम मिले’ में ड्रामा और भी तेज़ हो जाता है, जब राघव कीर्ति और विक्रांत के ख़िलाफ़ एक साफ़ रुख़ अपनाता है। हालात तब और भी ज़्यादा भावुक हो जाते हैं, जब कीर्ति की माँ राघव से मिलने आती हैं और उससे उन दोनों को माफ़ करने की गुज़ारिश करती हैं।
वह उसे पुराने रिश्तों की याद दिलाने की कोशिश करती हैं और उससे कहती हैं कि वह अतीत को भूलकर आगे बढ़ जाए। हालाँकि, राघव अपने जवाब में शांत लेकिन अपनी बात पर अडिग रहता है और उनकी गुज़ारिश मानने से इंकार कर देता है।राघव को लगता है कि कीर्ति और विक्रांत ने जो नुक़सान पहुँचाया है, वह इतना गहरा है कि उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
उसका मानना है कि जब विश्वास इतनी बुरी तरह से टूटा हो, तो माफ़ी नहीं दी जानी चाहिए। उसका पूरा ध्यान अपने परिवार की रक्षा करने और उन्हें जो तकलीफ़ उठानी पड़ी है, उसका सम्मान करने पर है। भले ही यह गुज़ारिश एक माँ की तरफ़ से आई हो, लेकिन राघव भावनाओं को अपने फ़ैसले पर हावी नहीं होने देता।रीत ने राघव को सहारा दिया और साफ़-साफ़ बात कीरीत ठीक उसी समय वहाँ पहुँचती है और देखती है कि राघव पर दबाव बढ़ता जा रहा है। वह आगे आती है और पूरी ताक़त और समझदारी के साथ हालात को संभालती है।
रीत कीर्ति की माँ से कहती है कि यह माफ़ी की उम्मीद करने का सही समय नहीं है और उनसे कहती है कि वे और ज़्यादा तनाव पैदा किए बिना वहाँ से चली जाएँ।रीत यह साफ़ कर देती है कि वह और राघव दोनों ही अपने फ़ैसले पर आगे बढ़ चुके हैं और अब वे पीछे मुड़कर नहीं देखेंगे। उसके शब्दों से यह ज़ाहिर होता है कि वह इमोशनल मैनिपुलेशन के बजाय अपनी गरिमा और आत्म-सम्मान को ज़्यादा अहमियत देती है।
वह राघव के लिए एक मज़बूत सहारे की तरह खड़ी रहती है और यह पक्का करती है कि राघव पर ऐसा कुछ भी करने का दबाव न डाला जाए, जिस पर उसे खुद विश्वास न हो।
आने वाले एपिसोड में यह पता चलेगा कि क्या कीर्ति और विक्रांत अपनी ग़लतियों को सुधारने की कोशिश करेंगे या फिर यह अलगाव हमेशा के लिए हो जाएगा। कहानी में यह भी दिखाया जाएगा कि क्या इतने गहरे धोखे के बाद भी रिश्ते फिर से ठीक हो सकते हैं।
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