
मन्नत: मन्नत (आयशा सिंह) ने विक्रांत (अदनान खान) से कहा कि वह वादे निभाने में असफल रहता है, दुआ का भविष्य बना उसकी प्राथमिकता, मन्नत में एक दिल तोड़ देने वाला मोड़ आता है, जब मन्नत दुआ को लेकर शहर छोड़ने का फैसला करती है। यह दूरी विक्रांत को गहराई से प्रभावित करती है। जैसे ही विक्रांत दुआ के साथ एक मजबूत जुड़ाव महसूस करने लगता है, मन्नत एक सख्त फैसला लेकर उससे दूर जाने का निर्णय लेती है।
यह फैसला विक्रांत को पूरी तरह से तोड़ देता है, क्योंकि उसे लगता है कि वह किसी बहुत अपने को खो रहा है। जाने से पहले मन्नत और विक्रांत के बीच एक तीखा टकराव होता है। मन्नत विक्रांत की रिश्ते संभालने की क्षमता पर सवाल उठाती है और कहती है कि वह वादे तो करता है, लेकिन उन्हें निभा नहीं पाता।
वह उसे याद दिलाती है कि जब जरूरी पलों में सबूत मांगा जाता है, तो भरोसा टूट जाता है।उसकी बातें उसके अपने दर्द और डर से निकली होती हैं, क्योंकि उसे लगता है कि दुआ के साथ भी वही सब दोबारा हो सकता है।विक्रांत आहत और खामोश रह जाता है। वह खुद को समझाने की कोशिश करता है, लेकिन मन्नत उसकी बात सुनने से इनकार कर देती है। उसके लिए दुआ की सुरक्षा किसी भी रिश्ते से ज्यादा अहम है।
मन्नत अपने फैसले पर अडिग, विक्रांत पछतावे और अकेलेपन से जूझता हैआने वाले एपिसोड्स में मन्नत के इस मजबूत फैसले पर फोकस होगा, जहां वह दुआ को विक्रांत से दूर रखने का निर्णय लेती है। वह नहीं चाहती कि उसकी बेटी ऐसा रिश्ता बनाए जो आगे चलकर टूट जाए।
दूसरी ओर, उनके जाने के बाद विक्रांत खुद को अकेला और बेबस महसूस करता है। उसे अब उस रिश्ते की अहमियत समझ आती है, लेकिन उसे डर है कि शायद अब बहुत देर हो चुकी है।
टकराव के दौरान उसकी खामोशी उसके अंदर चल रहे संघर्ष और पछतावे को दिखाती है।अब कहानी इमोशनल ड्रामा की ओर बढ़ रही है, जहां जुदाई, भरोसे की कमी और अनकहे जज़्बात आगे की कहानी को तय करेंगे।आगे क्या होगा जानने के लिए जुड़े रहें मन्नत के साथ।