
ये रिश्ता क्या कहलाता है: अभिरा (समृद्धि शुक्ला) अपराधबोध में टूटती है, लेकिन अरमान (रोहित पुरोहित) मुश्किल समय में बनता है उसकी ताकत, अभिरा इस समय अपनी जिंदगी के सबसे भावनात्मक दौर से गुजर रही है। उसे लगता है कि वह अपनी बेटी मायरा के लिए एक मां के रूप में असफल हो रही है।
अकेले बैठकर दर्द में डूबी अभिरा अपना आत्मविश्वास खो देती है और खुद को दोष देने लगती है। गुस्से और अपराधबोध में वह अपने चेहरे पर काला रंग तक लगा लेती है, जो उसके अंदर की टूटन को दर्शाता है।
अभिरा को लगता है कि वह मायरा का केस कोर्ट में लड़ने के लिए मजबूत नहीं है। उसे हारने का डर सताता है और वह सोचती है कि वह अपनी बेटी के लिए न्याय नहीं दिला पाएगी। उसके भावनाएं उसकी ताकत पर हावी हो जाती हैं और वह एक मां और वकील दोनों के रूप में खुद पर शक करने लगती है।
ऐसे मुश्किल समय में अरमान उसके सबसे बड़े सहारे के रूप में सामने आता है। वह अभिरा को समझाता है और याद दिलाता है कि एक मां का अपने बच्चे से सबसे गहरा रिश्ता होता है। अरमान कहता है कि अगर कोई मायरा के लिए सही मायनों में लड़ सकता है, तो वह अभिरा ही है। उसके शब्द धीरे-धीरे अभिरा की सोच बदलते हैं और उसे फिर से हिम्मत देते हैं।
अभिरा को मिला नया सुराग, केस संभालने का लिया फैसलाअरमान के सहारे से अभिरा खुद को संभालती है और केस लड़ने का फैसला करती है। वह सुराग ढूंढना शुरू करती है और फिर से तार्किक तरीके से सोचने लगती है। जल्द ही उसे एक अहम बात का पता चलता है, जो सब कुछ बदल सकती है।
उसे एहसास होता है कि लिखावट में हुई एक छोटी सी गलती कोई अनुभवी व्यक्ति जैसे अरमान नहीं कर सकता, जिससे उसे शक होता है।अभिरा को लगता है कि इस मामले में कोई और भी शामिल है और किसी ने मायरा की लोकेशन की जानकारी दी है।
यह सोच उसे उस हॉस्टल से जुड़े एक अहम कड़ी की तलाश करने के लिए प्रेरित करती है, जहां यह घटना हुई थी। इसी दौरान मुक्ति भी सच्चाई जानने की कोशिश कर रही है और मायरा की बेगुनाही साबित करने के लिए हॉस्टल पहुंचती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अभिरा, अरमान और मुक्ति मिलकर मायरा को बेगुनाह साबित कर पाएंगे? आने वाले एपिसोड्स में जबरदस्त भावनाएं, गहरी जांच और न्याय के लिए मजबूत लड़ाई देखने को मिलेगी।अपने पसंदीदा शोज़ के और अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।